
नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026
चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सामने आई एक खोजी रिपोर्ट के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से उठाई गई आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों सहित कई मुद्दे बताए गए हैं।
राहुल गांधी ने कहा—’टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे’
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में जो कुछ हो रहा है, वह गलत है।
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि “टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो।” उन्होंने अपने संदेश में वोटों की कथित हेराफेरी को संविधान और भारतीय मतदाताओं के खिलाफ अपराध बताया।
हालांकि, राहुल गांधी के वीडियो संदेश में उन्होंने सीधे तौर पर उस खोजी रिपोर्ट का नाम नहीं लिया था।
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को अपने फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर बार-बार अपनी असहमति दर्ज करानी पड़ रही है, तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश से संज्ञान लेने की मांग भी की।
डेरेक ओ’ब्रायन ने की कार्रवाई की मांग
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव से जुड़े पहले के घटनाक्रम को सामने लाया जाना चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर संसद में चर्चा और कार्रवाई की मांग की।
तेजस्वी यादव ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां संबंधित मंचों पर रखी थीं।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों पर अपेक्षित तरीके से कार्रवाई नहीं की।
अरविंद केजरीवाल का क्या कहना है?
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं और महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए।
केजरीवाल ने दावा किया कि कुछ आदेश आयोग की सामूहिक मंजूरी के बिना जारी किए गए और SIR प्रक्रिया को भी उन्होंने चुनौती दी।
संजय सिंह और संजय राउत ने भी साधा निशाना
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। वहीं शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। ये बयान संबंधित नेताओं के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
विपक्षी दलों के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों को अलग तरीके से देखने से पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होने की बात कही है।
आयोग के मुताबिक, सदस्यों द्वारा किसी प्रस्ताव या निर्णय से पहले सवाल, सुझाव और टिप्पणियां देना उसकी सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय सामने आना स्वाभाविक है और SIR सहित महत्वपूर्ण फैसले आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को बताया राजनीतिक हमला
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के भीतर विचार-विमर्श को मतभेद या संस्थागत संकट के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े फैसले लोकतांत्रिक और आधिकारिक विचार-विमर्श के बाद लिए गए थे।
आगे क्या?
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। फिलहाल एक ओर विपक्षी दल खोजी रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को गंभीर सवाल के रूप में उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग और बीजेपी का कहना है कि आंतरिक सुझाव एवं असहमति किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले की सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।


