
रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सांची अपने प्राचीन बौद्ध स्मारकों के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यहां स्थित रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सांची अपने प्राचीन बौद्ध स्मारकों के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यहां स्थित महास्तूप सहित बौद्ध स्मारकों का समूह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। सांची को भारत के प्राचीनतम बौद्ध केंद्रों में गिना जाता है। सांची के महान स्तूप का प्रारंभिक निर्माण मौर्य सम्राट अशोक के काल में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। बाद की शताब्दियों में इस परिसर का विस्तार हुआ और यहां स्तूपों, मंदिरों, विहारों तथा अन्य बौद्ध स्मारकों का विकास हुआ। परिसर के पत्थर के तोरण और रेलिंग अपनी बारीक नक्काशी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। इन पर बुद्ध के जीवन तथा जातक कथाओं से जुड़े दृश्य और प्रतीकात्मक चित्रण देखने को मिलता है। सांची के प्रमुख आकर्षणों में महास्तूप, अशोक स्तंभ, चार तोरण, अन्य स्तूप, मंदिर और पुरातात्विक संग्रहालय शामिल हैं। भारतीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार सांची बौद्ध सर्किट का महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न कार्य किए गए हैं। यूनेस्को के अनुसार सांची का स्मारक समूह भारतीय स्तूप वास्तुकला के विकसित रूप का महत्वपूर्ण उदाहरण है। सांची में स्थित बौद्ध स्मारक कई अलग-अलग कालखंडों की स्थापत्य एवं धार्मिक परंपराओं को एक साथ सामने रखते हैं। भोपाल से लगभग 46 किलोमीटर दूर स्थित सांची रायसेन जिले का प्रमुख विरासत पर्यटन स्थल है। जिला प्रशासन की वेबसाइट भी इसे विरासत एवं बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में दर्ज करती है।


