
रूस का यूक्रेन पर भीषण हवाई हमला, 20 लोगों की मौत का दावा; ट्रंप-पुतिन की डीजल डील से बढ़ा विवाद
यूक्रेन-रूस युद्ध: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए समझौते के बाद यूक्रेन में तनाव और बढ़ गया है। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस के हवाई हमलों में जापोरिज्जिया क्षेत्र में 20 लोगों की मौत हुई, जबकि कम से कम 18 लोग घायल हुए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले के लिए रूस की कड़ी आलोचना की है और अमेरिकी डीजल समझौते पर भी सवाल उठाए हैं।
रिहायशी इमारतों पर गिरे रूसी बम
यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले में कई लोगों की जान चली गई और अनेक लोग घायल हो गए। बचावकर्मियों ने क्षतिग्रस्त इमारतों के मलबे में फंसे लोगों की तलाश की।
इसी दौरान राजधानी कीव में भी मिसाइल हमले की खबर सामने आई। स्थानीय अधिकारियों ने वहां भी लोगों के घायल होने की जानकारी दी।
यूक्रेन का आरोप है कि रूस लगातार ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिक इलाकों पर हमले कर रहा है। हालांकि, युद्ध के दौरान सामने आने वाले हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि करना कई बार मुश्किल होता है।
ट्रंप-पुतिन की डीजल डील पर जेलेंस्की नाराज
रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने 9 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की आपूर्ति करेगा।
घोषित योजना के अनुसार, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और आगे 10 लाख टन की अतिरिक्त आपूर्ति की बात कही गई है। ट्रंप ने आने वाले समय में 30 लाख टन तक डीजल उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने रूसी डीजल की बिक्री पर लागू कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी है।
जेलेंस्की का कहना है कि रूस को ऊर्जा निर्यात से मिलने वाली अतिरिक्त कमाई उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता को मजबूत कर सकती है। यूक्रेन ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए अपने पश्चिमी सहयोगियों से रूस पर दबाव बनाए रखने की अपील की है।
रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमले
युद्ध के दौरान यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी के ड्रोन हमलों का इस्तेमाल करता रहा है। इन हमलों का उद्देश्य रूस की ईंधन आपूर्ति और युद्ध से जुड़ी आर्थिक क्षमता को प्रभावित करना बताया जाता है।
रूस की ओर से भी यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे, शहरों और अन्य ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच जारी इस कार्रवाई से युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
डीजल समझौते के बाद विवाद इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि यूक्रेन का मानना है कि रूस को ऊर्जा निर्यात की अनुमति देना मॉस्को पर आर्थिक दबाव कम कर सकता है।
अमेरिकी चुनाव और डीजल की बढ़ती कीमतें
अमेरिका में ईंधन की कीमतें आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक मुद्दा बन गई हैं। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ट्रक परिवहन, कृषि, निर्माण और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है। इससे वस्तुओं की आपूर्ति और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन का रूस से डीजल खरीदने का फैसला बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से कीमतों में कितनी राहत मिलेगी, यह वास्तविक आपूर्ति, वैश्विक मांग और रूस की रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा।
यूरोप और नाटो के सामने नई चुनौती
रूस से अमेरिकी डीजल समझौते ने पश्चिमी देशों की एकजुटता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब तक रूस के खिलाफ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का एक प्रमुख उद्देश्य उसकी युद्ध संबंधी आय को सीमित करना रहा है।
ऐसे में अमेरिका का रूसी डीजल के लिए प्रतिबंधों में राहत देना यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डीजल की आपूर्ति वास्तव में कितनी होती है, रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की नीति में और क्या बदलाव आते हैं और क्या इन घटनाक्रमों का रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कूटनीतिक कोशिशों पर कोई असर पड़ता है।
निष्कर्ष: ट्रंप-पुतिन की डीजल डील ने ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच एक नया टकराव पैदा कर दिया है। एक ओर अमेरिका ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं यूक्रेन को आशंका है कि रूस को मिलने वाला आर्थिक लाभ युद्ध को लंबा खींच सकता है।


